First day of college

आज कॉलेज में मेरा पहला दिन था।और में बहुत खुश थी।एक अलग ही अहसास था एक अलग ही उत्साह था।मैं कॉलेज में घुसी ही थी कि मैंने देखा कुछ लड़के लड़की ग्रुप बना कर बैठे हैं और उनके ठीक बीच मेरी तरह firstyear के कुछ student खड़े हुए हैं।और सीनियर स्टूडेंट उनकी ragging ले रहे हैं।मुझे ऐसा कुछ नही पता था कि इस कॉलेज में रैगिंग भी होती है।
ये सब देखके मैं डर गई और मुँह नीचे करके सीधे चलती गयी न मैंने अपने आस पड़ोस में देखा न ही आगे की ओर बस चलती गयी।और इस तरह चल रही थी कि मुझे ये भी सुध नही थी कि सामने से कोई रहा है और इतने में ही मैं एक सीनियर लड़के से टकरा गई
ओर इस वाख्ये से मैं और ज्यादा डर गई मेरी धढ़कने normal से ज्यादा तेज हो गयी।
मैने अपनी डरी हुई नजरो से ऊपर देखा तो मेरी आंखे एक बार को खुली की खुली रह गयी धधकने ओर तेज़ सी हो गयी और एक पल के लिए सहम सी गयी।
क्योंकि मेरे सामने एक थोड़े से लंबे बालों वाला अच्छी और सुडौल कद काठी वाला लड़का खड़ा था।जिसको देख किसी भी लड़की का दिल दो पल के लिए थम जाये।दो पल के लिए तो मेरी नजरे उसपे टिक सी गयी थी वो तो उसने मेरी आँखो के सामने से हाथ हिलाया  तो  मेरा ध्यान उसपर से हटा वरना पता नही मैं  तो उसी की आंखों में कहीं खो जाती।
जैसे ही मेरा ध्यान टूटा में हड़बड़ा गई ओर तेज़ी से कॉलेज के अंदर जाने लगी पर इसबार आगे देखते हुए।
पूरे दिन मैं उसी सीनियर लड़के के बारे में सोचती रही।
ओर सुबह का सारा वाख्या मेरी आँखों के सामने slow motion में चलता रहा ।
मैंने कभी सोचा भी नही था कि मेरा कॉलेज का पहला दिन किसी अनजान  लड़के की याद में बीत जाएगा।
खैर जैसे तैसे मैने कोलेज में दिन काट ही था कि शाम को छुट्टी के समय उस ही सीनियर से एक मुलाकात और हो गयी। मुलाकात का मतलब मुझे वो एक बार ओर दिख गए और वो भी उसी बस में जिस बस से मुझे  जाना होता है।अब इसे इतेफाक कह लो या मेरी किस्मत पर इस बार अंतर इतना ज़रूर था कि सुबह से वो शक्श मेरे लिए "तू "से "तुम " और "गया"से "गये" हो गए थे।
अब चाहे इसे आकर्षण कह लो या मोहब्बत पर मुझे फर्क नही पड़ता।
जिस तरह मेरा पूरा दिन कटा था ठीक उसी तरह मेरी पूरी रात कट गई ।और कब सुबह हो गयी पता ही नही चला।
आज भी कल की तरह मेरे में एक नया उत्साह था पर इस बार थोड़ा ज्यादा था।और इस बार नया कॉलेज है इस बात का उत्साह नही था बल्कि फिर से मुलाकात होने की आस थी।
मैं आज ज्यादा अछे से तैयार हुई और बिना कुछ खाये पिये कॉलज के लिए निकल गयी।और आज सोच के निकली थी  की आज नाम पता करना है।पर उनके सामने पड़ने पर बिल्कुल शांत बेसुध सी हो जाती थी।
ओर अब तो रोज़ की यही कहानी हो गयी थी।मैं उनसे बात भी करना चाहती थी पर कर नही पाती थी हिम्मत ही नही होती थी।ओर मेरा हाल कुछ इस तरह हो रहा था कि
                            जब भी मेरे करीब वो आते है
                            मेरी धढ़कने तेज़ कर जाते है
                            गर देख लेते है एक निगाह मुझे
                            मेरा पूरा चैन छीन ले जाते हैं
सोचती हूँ रोज
की एक मुलाकात करूँगी
कुछ बात उनसे करूँगी
पर जब भी वो सामने आते हैं
बोलती ही बंद कर जाते हैं।
ख़ैर एक दिन ऐसा आया जब कुछ सीनियर स्टूडेंट ने मुझे पकड़ लिया ओर मेरी रैगिंग करने के लिए बाकी जूनियर स्टूडेंट के साथ खड़ा कर दिया।उन सीनियर स्टूडेंट्स में वो भी थे।रैगिंग के नाम से मैं वैसे ही बहुत डरती थी और इस बार तो वो भी सामने बैठे थे ।
पर उन्होंने मेरे पर ध्यान नही दिया था अब तक।
फिर सब एक एक करके सबकी रैगिंग करने लगे मेरी भी बारी आई तो उन्होंने मुझपे ध्यान दिया उनमे से एक सीनियर ने मुझसे गाना गाने को कहा मैं गाने वाली ही थी कि उन्होंने कहा " अरे तुम वही लड़की हो न जो पहले दिन मुझसे टकराई थी और तुम मेरी बस से ही जाती हो न" इतना सुन के मेरी धड़कने तेज़ हो गयी और मैं कुछ कहती कि मेरी जवान मानो अटक सी गयी मैने हां में सिर हिलाया और उस दिन के लिए सॉरी कहने ही वाली थी मतलब आधा कह ही दिया था कि उन्होंने टोकते हुए कहा "अरे सॉरी किस बात का कोई बात नही होता हैं सबके साथ ।" उन्होंने मेरी तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा "मेरा नाम अभिषेक सक्सेना btech second year और आपका नाम क्या है? " मैं पहली लड़की थी जिसको बिना रैगिंग दिए किसी सीनियर का नाम पता चला हो वो भी इतनी इज़्ज़त के साथ और किसी सीनियर ने किसी जूनियर से आप कहा हो।
खैर ये तो साफ था कि मेरी तरह वो भी मुझे नोटिस करते थे और मैं भी उनके लिए तू या तुम से आप हो गयी थी।अब मैं उनसे बाते करने के बहाने ढूंढती थी और वो भी मैं अक्सर उनसे नोट्स मांगने या पढ़ाई के बहाने बात करती थी।धीरे धीरे हमारी बात होना शुरू हुई फिर एक दिन उन्होंने मुझसे मेरा फोन no मांगा मैं थोढ़ी देर के लिए थम सी गयी पर अंदर मन ही मन बहुत खुश थी।और मैंने उन्हें no दे दिया।अब मैं बस शाम का इंतज़ार कर रही थी कि कोई msg आएगा पर उस पूरी रात कोई msg नही आया ओर मैं उदास मन बार बार अपना फ़ोन चेक करती रही । पर अगली सुबह उनका msg आता है "good morning i am abhishake . आज कॉलेज जा रही हो क्या ?" में जल्दी से रिप्लाई करती हूं "हाँ " और पूछती हुँ "आप जा रहे हो कॉलेज"उनका जवाब आता है" हां मैं कॉलेज जा रहा हूं ये बताओ तुम कौनसे बस स्टॉप से चढ़ती हो"मैं उन्हें बता देती हो और पूछती हूँ "ये क्यो पूछ रहे हो"उधर से जवाब आता है "बस ऐसे ही" ओर वो ofline हो जाते हैं मैं कॉलेज जाने के लिए बस स्टॉप पहुचती हूँ और देखती हूं अभिषेक मुझसे पहले से ही वहां पहुच गए हैं और मेरा इन्तेज़ार कर रहे हैं।मैं बहुत खुश हुई ।और उस दिन से रोज़ इस ही तरह हुआ वो मेरे बस स्टॉप पर मुझसे पहले आ जाते  दोनों एक ही सीट पर बैठ के कॉलेज आते जाते थे।
हम दोनों जानते थे कि हमारे मन मे एक दूसरे के लिए बहुत ज्यादा प्यार भरा है पर अब तक हम दोनों में से किसी ने भी एक दूसरे को इज़हार नही किया था
और हम दोनों ही किसी खास दिन के इंतेज़ार में थे। खैर वो इंतेज़ार भी खत्म हुआ और अब हमारी fresher party हमारे सामने थी और उसी रात थी dj night . हम दोनों मन ही मन बहुत खुश थे औऱ सोच रहे थे कोनसा वो पल होगा जब हम में से कोई एक अपने मन की बात बताएगा पूरी पार्टी बीत गयी और किसी ने किसी से कुछ नही कहा
पर अभी dj night बाकी थी और ये शायद आखिरी मौका था । एक तो मैं वैसे ही इंतेज़ार नही कर पा रही थी कि dj वाले ने एक रोमांटिक song बजा दिया । अब मुझसे ओर नही रह गया में उनसे कहने ही वाली थी कि वो अपना हाथ आगे बढाते हुए घुटनो पर बैठ कर मुझसे  कहते  हैं " hey priya will you dance with me?"  और हमेशा की तरह मैं दो पल के लिए थम सी गयी और जवाब देती हूं"yes" और अपना हाथ उन्हें देती हूं और हम couple dance करने लगते हैं पर अभी तक हमने मन की बात नही बताई थी और मुझे अब उसे बताने की जरूरत भी नही लगती थी पर dance के लास्ट स्टेप पर उन्होंने मुझसे अपने मन की बात कही और बोले"hey priya i love u .will you be my girlfriend?" और मेरा जवाब तो शुरू से ही हाँ था।

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